ताजिया का मेला आज शनिवार को। संक्षिप्त में समझते है मुहर्रम को।

कृष्ण मोहन शर्मा, July 29, 2023

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इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम से शुरू होता है जिसे हिजरी के नाम से जाना जाता है। इसकी शुरुआत हजरत मोहम्मद साहब के मक्का से मदीना की तरफ हिज्ज्रत (प्रवास) हुई थी।

मुहर्रम माह की दसवीं तारीख को "यौम ए आसुरा"के दिन ताजिया निकाला जाता है।

पैगंबर मोहम्मद के नवासे(बेटी फातमा के पुत्र) इमाम हुसैन की शहादत को गम के रूप में मनाते है मुहर्रम।

इमाम हुसैन कर्बला के मैदान में अपने छः माह के पुत्र अली और अन्य साथियों संग यजीद के सैनिकों संग इस्लाम की रक्षा करते हुये मुहर्रम की दसवीं तारीख को शहीद हो गये थे।

इस्लाम में खिलाफत यानी खलिफा का राज था। ये खलिफा दुनियां के सारे मुसलमानों का प्रमुख नेता होता था। पैगम्बर साहब के वफात के बाद चार खलिफा चुने गए थे। मक्का से दूर सीरिया के गर्वनर यजीद ने खुद को खलिफा घोषित कर दिया। यजीद का काम बादशाहो जैसा था जो इस्लाम के विल्कुल खिलाफ था। इमाम हुसैन ने यजीद को खलिफा 'मानने से इंकार कर दिया था। यजीद ने अपने गर्वनर को फातवा लिखा और इमाम हुसैन को यजीद का आदेश मानने को कहा और नही मानने पर उनका सर कलम करने का आदेश दिया।

"यजीद के फरमान को इमाम हुसैन ने मानने से इंकार कर दिया और उन्होंने कहा था खुदा रसूल को न मानने वाले यजीद के फरमान को नही मानता और हज पूरा करने इमाम हुसैन मक्का चले गये। यजीद ने वहां भी यात्री के रूप में सैनिक भेज कत्ल करना चाहा,जो इमाम हुसैन को पता चल गया। मक्का पवित्र स्थान है यहां कत्ल हराम है। इसलिये इमाम हज के बजाय उसकी छोटी प्रथा उमरा करके परिवार सहित इराक चले गये।

मूर्हरम महीने की दो तारीख 61 हिजरी को हुसैन परिवार सहित कर्बला में थे। 9 तारीख तक यजीद की सेना को सही रास्ते पर लाना चाहा मगर वे न माने तब उन्होने अल्लाह के इबादत के लिये एक रात की मोहलत मांगी अगले दिन 72 साथी हुसैन के मारे गये। वे अकेले रह गये थे। अचानक भीड़ से उनके छ: माह के बेटे अली की आवाज आयी इमाम हुसैन भीड़ से अपने बेटे अली को गोद में लेकर कर्बला में आये। बेटे के लिये यजीद के सैनिको से पानी मांगा तो उनलोगों नही दिया जिससे उनके बेटे की मौत हो गयी उसके बाद सैनिको ने इमाम हुसैन का कत्ल कर दिया।