राज सम्पदा केवल संग्रह और दर्शन के लिए नहीं लोक कल्याण के लिये होती है-प्रेमभूषण

कृष्ण मोहन शर्मा, December 4, 2022

Views442

HighLights

  • # ''
  • गुठनी श्रीरामकथा महोत्सव के पांचवे दिन धनुष भंग एवं सीता-रामजी के विवाह प्रसंग का वाचन करते पूज्य महाराज जी ने कहा कि राज सम्पदा से जितना अधिक सत्कर्म और साज सज्जा होती है और ईश्वर की कृपा और बढ़ जाती है। भगवान बिना बताए ही आ जाते है इसलिए नित्य तैयारी रखो ना जाने किस रूप में नारायण मिल जाए। जिस देश, वेश एवं परिवेश में रहो भगवान का स्मरण करते रहो। किसी का प्रिय बनने के लिए ढलना एवं गलना पड़ता है। दूर रहकर भी प्रियता प्राप्त की जा सकती है। रामजी के दरबार में प्रवेश करने के लिए हनुमानजी की शरण तो लेनी ही पड़ेगी।

    ये विचार अयोध्या के ख्यातनाम कथावाचक परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज ने तरका ग्राम में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा महोत्सव के पांचवे दिन कथावाचन करते हुए व्यक्त किए। व्यास पीठ की विधिवत पूजा के बाद उस पर विराजित होकर परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज के मुखारबिंद से श्रीराम कथा वाचन शुरू हुआ तो पूरा पांडाल भक्ति के रस में डूब सा गया। कथा में पांचवे दिन भगवान के धनुष भंग एवं सीता-रामजी के विवाह प्रसंग की चर्चा हुई। ‘हम रामजी के रामजी हमारे है सेवा ट्रस्ट’ के बैनरतले कथावाचन करने वाले प्रेममूर्ति प्रेमभूषणजी महाराज ने कहा कि आपके ह्दय में क्या है ये भगवान को बताने की जरूरत नहीं वह तो सबके ह्दय में वास करते है। मां भगवती और भगवान सब जानते है कि किसके मन में क्या है। भोजन प्रसाद बन जाए तो समझ लेना लक्ष्य की पूर्ति हो गई।

    उन्होंने कहा कि जीव भाव समाधि में चला जाता है तो क्रिया का लोप हो जाता है। इसमें साधक और सहज जीव को विस्मरण हो जाता है। आनंद में रहिए समय का पता ही नहीं चलेगा। वाणी को बहुत मधुर रखना चाहिए। जितना विन्रम रहेंगे उतना ही लोग अधिक स्नेह करेंगे। हमेशा नम्र एवं शीलवान रहना चाहिए, किसी को भी छोटा नहीं माने, सूर्य का छोटा सा गोला पूरे विश्व को प्रकाशित करता है। पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज ने भगवान राम-जानकी के विवाह प्रसंग का वाचन किया तो पूरा माहौल जय सियाराम के जयकारों से गूंज उठा और हर्षित होकर भक्तगण झूमने लगे। भगवान राम एवं सीताजी के विवाह के प्रसंग का वाचन के दौरान पूरा माहौल उत्सवी हो गया। बधाईयां गूंजने लगी और सीतारामजी के जय हर तरफ होने लगी। कई श्रद्धालु राम-जानकी विवाह की खुशियां मनाने के लिए जमकर नृत्य करने लगे। श्रीराम कथा शुरू होने से पहले एवं प्रेममूर्ति प्रेमभूषणजी महाराज द्वारा कथा शुरू करने के बाद भी निरन्तर भजनों की गंगा माहौल को भक्ति के रस से सराबोर करती रही। इस दौरान पांडाल में जय सियाराम, जय रामजी के जयकारे गूंजते रहे। कई विशिष्ट अतिथियों सहित हजारों की संख्या में श्रोताओं ने झूमते हुए कथा का आनन्द उठाया।