संत के आचरण से ऊर्जा मिलता है-शालिनी त्रिपाठी
गुठनी
"संत दरस को जाईये,तज ममता अभिमान"।संत के दर्शन व जाये तो ममता और अभिमान दोनों का त्याग करके जाना चाहिये। उक्त बातें काशी नगरी से श्रीरामकथा वाचन को आयीं मानस मयुरी शालिनी त्रिपाठी ने अपने प्रवचन के दौरान कहीं।उन्होनें कहा संत आचरण और दर्शन से ऊर्जा मिलती है इसलिये उनके दर्शन से ऊर्जा प्राप्त करें। और संत के दर्शन दो सद्कर्म के प्रताप से होती है एक तो भगवन कृपा और दूसरा स्वयं के किये पूण्य से। जब हम स्वयं चलकर संत दर्शन को जाते है तो वह खुद के पुण्य का फल होता है तथा संत जब चलते चलते हमारे दरवाजे या हमारे पास से गुजरते है और उनका सानिध्य मिलता है तो वह भगवन कृपा से संभव हुआ होता हैं। गुठनी के उत्तर मठिया के प्रांगण में चल रहे श्रीरामकथा महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार रात्रि श्रोताओं की काफी भीड़ हुयी और महिलाओं ने तो मानस मयुरी के संगीतमयी श्रीराम आचरण के वर्णन पर झूम उठी।
श्रीरामकथा आयोजन समिति में शामिल प्रखंड प्रमुख विंध्यवासिनी नारायण सिंह,नगर पंचायत मुख्य पार्षद राजेश कुमार गुप्ता,पूर्व प्रमुख कामोद प्रसाद नारायण सिंह,पीएमसीएच के वरीय शल्य चिकित्सक डॉ रविन्द्र नाथ शुक्ल,आचार्य पं दिनेश पांडे,प्रसिद्ध श्रीमद्भागवत कथा वाचक रवि प्रकाश मिश्र,संजय सिंह,महंत उपाध्याय,सुबोध मिश्र,राजा गुप्ता सहित काफी लोग कथा और श्रोताओं के सुबिधा व्यवस्था में अपनी भूमिका निभा रहे है।
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