महिला दिवस विशेष...
HighLights
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जश्न का सुनहरा अवसर,सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर आधी आवादी को खुश करने का हर संभव प्रयास,महिलाओं को सम्मानित किया जाना,आधी आवादी के विकास के बिना राष्ट्र के विकास को अधूरा बताया जाना इसके अलावा भी कितनी सारी बाते हुई नारी उत्थान की और आधी आबादी की उपाधि से विभूषित ये नारी अपनी बेदना और व्यथा उसी सभा मे व्यक्त करती रही कभी गीत के माध्ययम से तो कभी अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त कर पर हम नारी सुरक्षा व सम्मान का ढिढोरा पीटने वाले नारी अधिकार का हनन कर उसी सभा मे बैठे वेदना भरी गीत के लय पर तालिया बजाते रहे।क्या यही है उत्सव का लक्ष्य,क्या यही है महिला सम्मान,क्या यही है नारी सुरक्षा,क्या यही है आधी आवादी के विकास का मूल मंत्र ?
सच मे आधी आवादी के विकास की बात करनी है तो उनके अधिकार की पूर्ण आजादी देनी होगी,उनकी भावना को जानना होगा, उनकी आवाज को वुलन्द करना होगा,उनके अधिकार के हनन की भावना त्यागनी होगी और भी बहुत कुछ करनी होगी।आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जीविका परियोजना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में जीविका दीदियों ने क्षेत्रीय भाषा भोजपुरी में जिस गीत की प्रस्तुति की उस गीत ने सबके हृदय को झकझोर के रख दिया था,जो नारा सरकार द्वारा लगाया जा रहा है दहेज व बाल विवाह के खिलाफ उसी पर अर्धारित भोजपुरी गीत" जनती की जारल जइबू दहेज की आग में"और काही के बेटी जन्मवलु ए माई" ने श्रोताओं को भावविह्वल कर दिया।कहने का मतलब आधी आवादी को त्रासदी मुक्त के उपाय क्या है।सरकार तो समय समय पर कुछ न कुछ करना चाहती पर अमली जामा क्यो नही पहना पाती।यही नही बिहार पंचायती राज में आधी आवादी के लिए आरक्षण है और आरक्षण के तहत सभी पदों पर महिला आसीन भी है पर जब सदन में बैठना होता है,बैठकों में शामिल होना होता है,या जब कोई निर्णय लेना होता है तो उनके पति,पुत्र और अन्य सम्बंधी प्रतिनिधि लेते है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सुदर ग्रामीण क्षेत्र से लेकर सदन तक महिलाओं ने सड़क पर आकर अपने सुरक्षा और सम्मान के साथ साथ उच्च सदनों में भी आरक्षण की मांग रखी मगर कौन सुना कितना सुना क्या जवाब दिया इसके लिए कौन समिति गठित हुई क्या आस्वाशन मिला ये गौर करने का विषय है।महिलाओं ने तो इस महिला दिवस पर अपनी एकता भी दिखा दी और बिहार विधान परिषद में महिला आरक्षण के मुद्दे पर पक्ष विपक्ष की महिलाओं ने एक स्वर बना दिया।सदन में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने एक साथ एक आवाज उठायी और अन्य सदस्या ने समर्थन किया।वही सिवान में जिलापरिषद की सदस्या शोहिला गुप्ता व भाकपा०माले की नेत्री मालती राम के नेतृत्व में महिला सम्मान व सुरक्षा के साथ उच्च सदन में 33%आरक्षण की मांग की गई और शहर के सड़को पर दर्जनों महिलाओं ने बैनर पोस्टर के साथ मार्च भी किया। नया थीम आया है ग्रामीण महिलाओं का विकास सम्मान व सुरक्षा बिल्कुल सही थीम है क्योंकि महिला जिस 33%आरक्षण की मांग कर रही है उच्च सदन में वह आरक्षण ग्रामीण(पंचाय ती राज)में 50% लागू है परंतु धरातल पर उतना निखार नही आया है इस 50% मे।इस स्थिति को देखकर एक सवाल उभर आया है क्या वास्तव में भारतीय महिलाओं को उनका पूर्ण अधिकार प्राप्त है ? नही तो फिर कब मिलेगी इस"आधी आबादी को पूर्ण अधिकार।
सरकार महिला विकास व उत्थान के लिए चाहे जितना प्रयास कर ले लेकिन अब भी महिलाओं की स्थिति वैसी ही है हां थोड़ा बदलाव जरूर आया है पर आज की महिला के अधिकार व स्वतंत्रता कही न कही बाधक है।महिला विकास के लिये स्थानीय निकाय व पंचायत में आधी हिस्सेदारी दी गयी है पर क्या ये महिलाये प्रधान,मुंखिया,पार्षद,अध्यक्ष बन कर भी स्वतंत्र रूप से फैसले ले पाती है। भारत देश के भिन्न भिन्न राज्यो में महिलाओं के विकास के लिए,महिलाओं को राजनीति के क्षेत्र में 50% आरक्षण यानी बराबरी का हक़ अधिकार देने की कोशिश में सरकार प्रयत्नशील है और इसे पंचायती राज में लागू भी कर दिया गया है ताकि महिलाओं को समानता का अधिकार मिल सके परंतु क्या वास्तव् में पुरुष प्रधान देश भारत में महिलाओं को अब तक सामान हक़ मिल पाया है? जबाब ढूढेंगे तो नकारात्मक मिलेगा।आज भी भारत के अधिकतर राज्यों में महिलाओं के नाम पर पुरुष अपना राज चला रहे हैं महिला के लिए आरक्षित पद है और महिला ही उस पद पर चयनित प्रतिनिधि है और अधिकार दिख भी रहा लेकिन हस्ताक्षर तक सिर्फ और सिर्फ कागजों पर ही उसका नाम सीमित है। महिला का सम्पूर्ण कार्य उसके पति,पुत्र या अन्य संबंधी कर रहें है।महिला को वास्तव में एक चलता फिरता गुड़िया समान बना कर रख दिया जाता है और उसके पति उसके मुखिया बन बैठ कर हकुमत चलाते हैं।
लगता है आधी आवादी के विकास के लिए हमें जरूरत है अफ्रीकी देश रवांडा से कुछ सीखने की ज्यादा अनुभव तो नही लेकिन आईपीओ के 2012 के रिपोर्ट कुछ ऐसे ही इशारा करते है।इंटरपार्लियामेंट्री यूनियन (IPO) के 2012 के आकड़ो पर नजर डाले तो छोटा सा अफ़्रीकी देश रवांडा में महिलाये राजनीति में सर्वोच्च स्थान पर है यह देश महिलाओं की भागीदारी को लेकर दुनिया के देशों में सबसे ऊपर है और हमारा भारत महिला शशक्तिकरण का पुरजोर समर्थन करते हुए भी महिला भागीदारी के क्षेत्र में दुनिया में 105 वे स्थान पर है।
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